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भाषण कैसे दे ?

आजकल हर जगह प्रत्येक अवसर पर भाषण करने की परम्परा है कोई सम्मेलन हो, अधिवेशन हो ,उत्स्व हो , गोष्ठी हो , जयंती हो ,शोक सभा हो ,भोज का अवसर हो ,जन्मदिन की पार्टी हो --- दो चार व्यक्तियों का भाषण  करना जरुरी है , व्यक्ति जितना ही महत्वपूर्ण होता है उसके के लिए भाषण उतना ही आवश्यक होता है।  स्वागत मंत्री अथवा अतिथि के लिए कहे जाने पर कोई यानि हम या आप  क्या कहे अथवा हमको क्या कहना चाहिए यह बहुत महत्वपूर्ण है। 
                               कुछ साहसी लोग कह सकते है कि  इसमें क्या है , खड़े हो जाओ और बोलना शुरू कर दो ,जैसा अवसर हो, वैसा कह दो , हमारे विचार से कहना आसान है ,करना बहुत कठिन हैं ,पहले तो जनता के सामने खड़े होकर बोलना हर किसी के वश की बात नहीं है ,दूसरे एकाएक भाषण करने लगाना बहुत कठिन होता है और सबसे अधिक कठिन काम होता है अवसर के अनुकूल बात कहना। समय पर एकाएक भाषण करने वाले लोग दुनिया में गिने चुने लोग होंगे। अन्यथा समस्त श्रेष्ठ भाषण कर्ता पहले से अपना भाषण करने वाले व्यक्ति स्वयं अपने आप को तथा अपने श्रोताआ एवं मित्रो को सामान रूप से निराश करते है। 
                                                                                         जो व्यक्ति भाषण करना आरम्भ कर रहा है अथवा भाषण की कला में पारंगत होना चाहता है है, उसकी पूरी तयारी के साथ ही आरम्भ कारन चाहिए।  अन्यथा एकाएक मंच पर जाकर खड़े हो जाने के उपरांत भाषण -कर्ता को अंधकार में टटोलना ही परता है और वह उपयुक्त भाषण नहीं कर पाटा है।  भाषण तैयार करने का अर्थ का मतलब होता है अपने मस्तिष्क में अपने भाषण की  सुनिश्चित रूप रेखा बना लेना।  किसी भी भाषण की सफलता प्रायः दो बातो पर निर्भर करती है:- 
  1. संबंधित विषय की पूरी जानकारी अर्थात विषय पर अधिकार  
  2. अपनी बात को , अपने ज्ञान को स्पष्ट एवं सशक्त भाषण में व्यक्त करने की क्षमता। जिस वक्त में ये दोनों गुण  होते है ,उसका भाषण श्रोताओ और स्वयंवक्ता के लिए सुखदायी होता है सारांश यह है कि भाषण करते समय short and sweet(अर्थात संक्षिप्त एवं मधुरवाले सिद्धांत का स्मरण भाषाब रखना चाहिए ) . जो कुछ कहना है - सम्बंधित कहानी , मजाक , धन्यबाद -ज्ञापन ,जीवनी आदि सब कुछ कम से कम शब्दों में कहकर अपनी बात समाप्त कर देने चाहिए। भाषण की समाप्ति पर श्रोताओ के मध्य यदि यह भावना बनी रहे कि "थोड़ी देर और बोलते "तब भाषण सफल माना जाएगा। . परन्तु भाषण के मध्य इस प्रकार के घुस  लगे कि "कब खत्म करेंगे"अथवा भाषण की समाप्ति पर श्रोताओ के मध्य इस प्रकार की प्रतिक्रिया हो कि चलो छुट्टी तो हुई , बहुत बोर किया , तो स्पष्ट है कि भाषण असफल माना जाएगा अतृप्त सौंदर्य की पहचान है।  यह बात भाषण पर जितना लागू होती है , उतनी अन्यत्र बहुत  लागु होती है।                                                                                               नए वक्ताओ के लिए सुझाव :-जिस किसी भी विषय पर बोलना हो पूर्व तैयारी बिना भाषण प्रभावशाली नहीं होता।  प्रश्न है तैयार कैसे करे? इसके लिए कुछ सुझाव है -
  •  1 . सर्वप्रथम अगर वाद विवाद प्रतियोगिता हो तो वैसा ही विषय चुने जो आपकी पूर्व मान्यताओं से मेल खाते हो या फिर जिनके विषय आपको  पसंद हो। 
  • 2 . फिर विषय से सम्बंधित त्तथ्यो का संग्रह करे ,स्रोत निम्नलिखित हो सकते है -
  • (क ) विषय से सम्बंधित पुस्तके -जो पुस्तकालय से प्राप्त हो सकती है। 
  • (ख ) समाचार पत्र एवं पत्रिकाएं 
  • (ग )मित्रो से बात चित , इसकी विधि यह है कि बातचीत के कर्म में ही आप विषय की बीच में चर्चा ऐसे करे जैसे यह स्वाभाविक सन्दर्भ से ही आगया हो। इससे आपके विचार को बल मिलेगा और आत्म विश्वास बढ़ेगा। 












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